शहीदों की ज़मीं है जिसको हिंदुस्तान कहते हैं...
मुनव्वर राणा (Munawar Rana)
जहां सभी शायरों को हमने हुस्न और शराब पर ही शायरी करते सुना है
वहीं एक मात्र भाई मुनव्वर राणा ही मिले जिन्होंने अपनी शायरी में माँ को केंद्र बना कर लिखा और बहुत ही गहरा प्रभाव दिया ।
मुनव्वर राणा अक्सर हमारे शहर आते रहे और यही उनसे मिलने का भी मौका मिला ।
मुनव्वर राणा उर्दू शायरी का एक बहुत बड़ा नाम है। हर उम्र के लोग राणा साहब को उनके बेखौफ और बेलाग अंदाज की वजह से पसंद करते हैं।
हम सभी उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुवे,उनके द्वारा लिखे कुछ शेर प्रस्तुत करते है
Where we have
heard all the poetry on women and liquor.
At the same
time, the only Munawar Rana who wrote in his poetry by making mother the center
and gave a very deep impact.
Munawar Rana
often visited our city Indore and got the chance to meet him.
Munavvar Rana
is an established big name of Urdu poetry.
People of all
ages like Rana Saheb because of his fearless and uninteresting style.
We all wish
him a good health and remember him and will keep doing. Here we present some of
his memorable poetry (शायरी)
लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई
मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ
ख़ुद को इस भीड़ में तन्हा नहीं होने देंगे
माँ तुझे हम अभी बूढ़ा नहीं होने देंगे
यहीं रहूँगा कहीं उम्र भर न जाउँगा
ज़मीन माँ है इसे छोड़ कर न जाऊँगा
निचे दिए लिंक से आप सुनिए श्री मुनव्वर राणा का कलाम उन्ही की आवाज और अंदाज में
https://www.youtube.com/watch?v=VivsrODU-Ms

Munnawar rana ji is an extraordinary shayar of our time
जवाब देंहटाएंVery nice and thoughtful !
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