GULZAR (गुलज़ार)एक बेताज बादशाह
सम्पूर्ण सिंह कालरा (गुलज़ार) का जन्म एक पंजाबी सिख परिवार में हुवा।
परिवार के साथ आप मात्र 14 साल की उम्र में एक शरणार्थी के रूप में भारत भूमि पर आये।
आपने अपने जीवन की शुरवात एक मोटर मैकेनिक के रूप में की।
बहुत ही अजीब लगता है की विश्व के ख्यातनाम लेखक एक गेराज में काम करते हुवे भी अपनी कल्पना लोक में एक से बढ़ कर एक रचनाओं को जन्म दे सकता है , मगर गुलजार ने यह किया।
क्या कोई सोच सकता है की
हमारे से पहली पीढ़ी का गीत " मोरा गोरा अंग लई ले,मोहे शाम रंग दई दे………."
सन 1963
बच्चों का सबसे प्रिय गीत " जंगल जंगल बात चली है ,पता चला है चड्डी पहन कर फूल खिला है………."
सन 1990
युवाओ का प्रिय गीत " बीड़ी जलाइले जिगर से पिया ,जिगर में बड़ी आग है………. "
सन 2006
राष्ट्र प्रेम से जुड़ा गीत "ऐ वतन,मेरे वतन,ऐ वतन आबाद रहे तू……….."
सन 2018
और न जाने कितने गीत सिर्फ एक ही लेखनी ने लिखे जिसे हम गुलज़ार के नाम से जानते है
अपने लम्बे शायरी के सफर में गुलज़ार जी ने बहुत ही नायाब गज़ले भी हमे दी है ,जिनका जिक्र भी जरुरी है।
गुलज़ार जी की कुछ गज़ले जिन्हे श्री जगजीत जी ने अपनी जादुई आवाज़ से अमर कर दिया :
दिन कुछ
ऐसे गुज़ारता
है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई …..
https://www.youtube.com/watch?v=K2OtWApwmtQ
हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते………
https://www.youtube.com/watch?v=Q87TZLzRfwU
एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी
https://www.youtube.com/watch?v=n7k9MSZj31Q
आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ
उठता तो है घटा-सा बरसता नहीं धुआँ……..
जगजीत जी और गुलज़ार की जोड़ी के ही समकालीन ही भूपेंद्र जी ने भी कुछ बहुत अच्छी गज़ले गायी है :-
हवा गुज़र गयी पत्ते थे कुछ हिले भी नहीं
वो मेरे शहर में आये भी और मिले भी नहीं……
तिनका तिनका कांटे तोड़े ,सारी रात कटाई की
क्यों इतनी लम्बी होती है चांदनी रात जुदाई की………
https://www.youtube.com/watch?v=5LDjxQmdC5U&t=898s
गुलज़ार जी की रचनाओं में उर्दू ,हिंदी,लोक भाषा और सूफी साहित्य का बेजोड़ मिलाप है ।
हम लोग सोभाग्य शाली है की हमारे नसीब में इन महान लेखकों एव गायको का संगीत साथ मिला है ।

Nice effort
जवाब देंहटाएंSabse Juda fir bhi sabki Pasand
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